विवरण 
रत्न आकर्षक खनिज का एक टुकड़ा  होता है जो कटाई और पॉलिश करने के बाद गहने और अन्य अलंकार बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

प्रकार 
रत्न तीन प्रकार के होते हैं:
1. खनिज रत्न
2. जैविक रत्न
3. वनस्पतिक रत्न

उत्पति
तीनो रत्नो की उत्त्पत्ति इस प्रकार है:
खनिज रत्न की उत्पति खनिज से, जैविक रत्न की उत्पति समुन्द्र से और वानस्पतिक रत्न पर्वतो से प्राप्त होते हैं | 

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धार्मिक मान्यता 
अग्नि पुराण के अनुसार:
महाबली असुरराज वृत्रासुर न देवलोक पर आक्रमण किया था तब भगवन विष्णु के सलाह पर इन्द्र देव ने महर्षि दधीचि से वज्र बनाने हेतु उनके हडियो का दान मंगा। फ़िर इशी वज्र से देवताओ ने व्रतसुर को मार। अस्त्र (वज्र) के निर्माण के समय दधीचि ऋषि की अस्थियों के जो सुक्ष्म अंश पृथ्वी पर गिरे उनसे तमाम रत्नो की खनन से उत्तपती हुई।

रत्न और नवरत्न 
समान्य तौर पे ग्रहो और नक्षत्रों के अनुसार ज्योतिष में  मात्र नवरत्नों को ही लिया जाता है। इन रत्नो के उपलब्ध न होने पर इनके उपरत्नो या समान्य  प्रभावकारी रत्नो का प्रयोग किया
जाता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार कुल 84 रत्न पाए जाते हैं जिनमे माणिक, हीरा, मोती, निलम, पन्ना, मूंगा, गोमेद, तथा लहसुनिया को नवरत्न मना गया है। ये रत्न ही समस्त सौर मंडल के प्रतिनिधि माने जाते हैं। यही कारन है की इन्हे धारण करने से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है 

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